- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- मॉनसून से पहले...
मॉनसून से पहले महाराष्ट्र में जल संकट गहराया, Pune डिवीजन में सबसे कम 25.26% जल भंडार

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में मॉनसून से पहले जल संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य के पुणे डिवीजन के बांधों में इस समय केवल 25.26% पानी बचा है, जो पूरे महाराष्ट्र के सभी डिवीज़नों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी और पानी की अधिक खपत के कारण जलाशयों का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे प्रशासन और नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।
महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने इस स्थिति को देखते हुए लोगों और किसानों से पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में जल संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई की समस्या गंभीर न हो।
अधिकारियों के अनुसार, पूरे राज्य में स्थित 3,000 से अधिक बांधों में कुल जल भंडार फिलहाल 33.95% पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा सामान्य से कम माना जा रहा है और कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर असर डाल सकता है।
पुणे डिवीजन की स्थिति अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक चिंताजनक है। यहां जल स्तर राज्य के औसत से भी काफी नीचे दर्ज किया गया है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में पुणे डिवीजन में जल भंडार 22.29% था, लेकिन इस बार हालात अपेक्षाकृत थोड़े बेहतर होने के बावजूद चिंता बनी हुई है, क्योंकि गर्मी का असर अभी जारी है और बारिश आने में समय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में बारिश में देरी होती है, तो कई इलाकों में पानी की किल्लत और बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सीधा असर खेती और पशुपालन पर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन ने स्थानीय निकायों को भी जल उपयोग पर निगरानी रखने और अनावश्यक पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे घरेलू उपयोग में पानी की बचत को प्राथमिकता दें।
कुल मिलाकर, राज्य में मौजूदा जल स्थिति ने मॉनसून से पहले ही जल प्रबंधन को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।





